Last Updated on 2 months ago by Team Trending Bharat
त्राटक अभ्यास सिर्फ एक ध्यान की तकनीक नहीं है- ये आपकी सोच को अनुशासित एक्शन में बदलने का एक गहरा अभ्यास है। सालों तक मैंने खुद की लक्ष्य लिखे थे जैसे इस साल मुझे savings करके 5 लाख रुपये बचाने हैं – लेकिन वो सब नोटबुक में दबकर रह गए।
तब मुझे एहसास हुआ कि सिर्फ सोचने से कुछ नहीं बदलता- बदलाव आता है प्रैक्टिस से। यहीं से ट्राटक अभ्यास मेरी जिंदगी में आया
ये बस एक जगह टिककर देखने की प्रक्रिया है- लेकिन इसमें सिर्फ आंखें नहीं बल्कि पूरा मन लगाना पड़ता है। स्वामी विवेकानंद जैसे महान लोगों ने भी इसे अपनी साधना में अपनाया और आज कई सफल लोग इसे जिंदगी का हिस्सा बनाते हैं।
इसका असली मकसद है ख्यालों और कल्पना को असल जिंदगी में उतारना है आइए जानते हैं कैसे संक्षिप्त मे बताऊँ तो क्योंकि ये मन, शरीर और सांस को एक साथ जोड़ता है- जिससे फोकस बढ़ता है और लक्ष्य हासिल करने की ताकत मिलती है …
Table of Contents
त्राटक अभ्यास में शरीर सांस और नजर का संबंध

त्राटक अभ्यास में शरीर, सांस और नजर का गहरा संबंध है- सबसे पहले अपनी पीठ को सीधी रखें, कंधों को खोलें और गहरी सांस लें। सांस का सही तालमेल आपको भीतर से मजबूत बनाता है। अब नजर को एक जगह टिका दें – जैसे दीपक की लौ या मोमबत्ती पर। झपकना मत, भटकना मत। धीरे-धीरे ध्यान और नजर दोनों एक जगह टिकने लगते हैं और इसी से मन, शरीर और सांस तीनों जुड़ जाते हैं। ये संबंध त्राटक अभ्यास की बुनियाद है, जो इसे सामान्य ध्यान से अलग करता है
त्राटक अभ्यास करने का तरीका – तीन आसान steps
पहला स्टेप-: सांस और प्राण पर नियंत्रण
- शांत जगह बैठिए- रीढ़ सीधी को सीधा रखो
- गहरी सांस … पेट तक भरें.. 4-5 सेकंड रोकें-
- धीरे-धीरे छोड़ें– पेट से नाभि- फिर सीने और माथे तक…
- इसी तरह 5-10 मिनट तक दोहराएं….
- अगर लय आ जाए…तो सांस छोड़ते हुए… “ॐ” बोलें -108 बार तक कर सकते हैं-
दूसरा स्टेप-: दृष्टि एकाग्रता
- अब आंखें खोलिए.., दीपक या मोमबत्ती की लौ को देखिए
- सांस वैसे ही चलती रहे जैसी पहले स्टेप में थी..
- पूरा ध्यान लौ पर रखो – अगर माथे में हल्का कंपन या धड़कन महसूस हो तो समझिए सही जा रहे हैं
तीसरा स्टेप-: लक्ष्य को सच मानना
- अब दीपक को छोड़ो .. सामने दीवार पर अपना लक्ष्य लिखिए …जितना साफ.. उतना अच्छा…
- फिर उसी तरह सांस का अभ्यास दोहराएं– फिर आंखें खोलकर अपने लक्ष्य को पढ़ें
- आंखें बंद करें और सोचिए कि आपने वो लक्ष्य पा लिया है – जैसे वो चीज़ आपके हाथ में है
- हर दिन 20-30 मिनट ऐसा करें- और अगर मुमकिन हो तो दिन में 2-3 बार, सुबह जल्दी… शाम को… या सोने से पहले…
त्राटक अभ्यास के फायदे और सीमाएँ
ट्राटक अभ्यास के फायदे कई हैं। ये ख्यालों को साफ करता है लक्ष्य तय करने में मदद करता है और मनोबल बढ़ाता है। सांस और ध्यान से मन को शांति मिलती है खुद पर भरोसा बढ़ता है। सबसे अच्छा इसमें कोई कठिन मंत्र या गुरु की जरूरत नहीं- खुद से कर सकते हैं।
लेकिन सीमाएं भी हैं
अगर सांस या बैठने की मुद्रा गलत हो तो चक्कर या थकान हो सकती है। सिर्फ दीपक घूरने से कुछ नहीं होगा लगातार और ईमानदारी से करना जरूरी है। ये आपकी जिम्मेदारियों या फाइनेंशियल प्लानिंग का विकल्प नहीं बल्कि सहायक तरीका है।
त्राटक अभ्यास कब करें और कब न करें

कब करें – जब सुबह-सुबह का सुकून हो., शाम की शांति- या सोने से पहले का समय..जब आप अपने लक्ष्य को लेकर वाकई गंभीर हों..
कब न करें–अगर आंखें थकी हों… नींद पूरी न हुई हो…, या दिमाग बहुत परेशान हो– नशे या भारी तनाव की हालत में भी न करें
आगे क्या करें? Practical Action Plan
एक नोटबुक लो और एकदम साफ-साफ अपना लक्ष्य लिखो — जितना खास होगा … उतना अच्छा — जैसे 5 लाख रुपये बचाना या नई किताब पूरी करना
हर दिन 20/30 मिनट त्राटक करें – सांस.. दीपक– फिर लक्ष्य–रोज़ प्रैक्टिस बनाएं…
हर महीने खुद को जांचें— सोचें कि क्या बदला… क्या बेहतर हुआ- क्या नहीं? रिजल्ट दिखे तो अच्छा,,, नहीं तो फिर से कोशिश करें…
👉 अगर ये लेख आपको सोचने पर मजबूर कर गया, तो इसे सेव करें और रोज़ याद दिलाने के लिए दोबारा पढ़ें
मेरा नजरिया (My Point of View)-त्राटक अभ्यास
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जहां हमारा मन हर पल स्क्रीन पर भटकता रहता है क्या त्राटक अभ्यास जैसी सदियों पुरानी तकनीक वाकई हमें वापस अनुशासन और फोकस की राह पर ला सकती है? मेरी नजर में इसका जवाब हां है – लेकिन कुछ संतुलित समझ के साथ।
मुझे लगता है कि त्राटक अभ्यास की असली ताकत ये है कि ये सिर्फ आंखों का व्यायाम नहीं बल्कि मन को ट्रेन करने का एक साइंटिफिक तरीका है। रिसर्च दिखाते हैं कि नियमित प्रैक्टिस से स्ट्रेस हॉर्मोन कम होता है मेमोरी और कॉग्निटिव फंक्शंस बेहतर होते हैं – खासकर बुजुर्गों में। एक आम भारतीय के लिए जो सुबह से शाम तक फोन, टीवी और काम की टेंशन में घिरा रहता है ये प्रैक्टिस आंखों की थकान दूर करने से लेकर नींद की क्वालिटी सुधारने तक मदद कर सकती है।
मैंने खुद देखा है कि आजकल के युवा जो घंटों स्क्रीन देखते हैं, उनकी कंसंट्रेशन पावर कम हो रही है – और त्राटक अभ्यास यहां एक नैचुरल सॉल्यूशन की तरह काम करता है बिना किसी दवा या गैजेट के
फिर भी बैलेंस्ड नजरिया रखना जरूरी है। जहां ये फोकस बढ़ाता है और मन को शांत करता है वहीं अगर गलत तरीके से किया जाए – जैसे ज्यादा देर तक बिना ब्रेक के – तो आंखों में जलन चक्कर या थकान हो सकती है। ये कोई जादू की छड़ी नहीं जो रातोंरात सब बदल दे; इसके लिए लगातार मेहनत और धैर्य चाहिए। याद रखें कि त्राटक अभ्यास सिर्फ सपोर्टिव टूल है – असली बदलाव तो आपकी डेली एक्शंस और प्लानिंग से आएगा॥
भारतीय संदर्भ में देखें तो स्वामी विवेकानंद जैसे महान लोग इसे अपनी साधना का हिस्सा बनाते थे क्योंकि ये न सिर्फ व्यक्तिगत विकास देता है बल्कि आत्म नियंत्रण की वो ताकत जो हमें जीवन की चुनौतियों से लड़ने लायक बनाती है। आज के समय में जब मेंटल हेल्थ इश्यूज बढ़ रहे हैं त्राटक अभ्यास जैसी प्रैक्टिस हमें ग्राउंडेड रख सकती है – खासकर जब हम लक्ष्य विजुअलाइजेशन के साथ इसे जोड़ते हैं।
आगे देखें तो मुझे विश्वास है कि अगर हम इसे अपनी रूटीन में शामिल करें – सुबह 10 से 20 मिनट से शुरू करके – तो छोटे-छोटे लक्ष्यों से बड़े बदलाव तक पहुंचना आसान हो जाएगा। ये हमारे हाथ में है कि हम इस प्राचीन ज्ञान को आधुनिक लाइफस्टाइल के साथ कैसे मिक्स करते हैं
अंत में- त्राटक अभ्यास मुझे ये सिखाता है कि असली पावर बाहर नहीं भीतर है। आप भी कभी ट्राय करके देखिए – शायद आपका मन भी कहे, “हां, ये काम करता है!” ये मेरा व्यक्तिगत नजरिया है आधिकारिक सलाह नहीं – अगर कोई हेल्थ इश्यू हो तो एक्सपर्ट से कंसल्ट जरूर करें
लेखक: अरविंद
अरविंद एक अनुभवी आध्यात्मिक मार्गदर्शक और विशेषज्ञ सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियर हैं… जो जीवन के आंतरिक और बाहरी आधारों को जोड़ने का एक अनूठा दृष्टिकोण लाते हैं…
अनुभव एवं विशेषज्ञता:
- आध्यात्मिकता एवं ध्यान-: उन्हें ध्यान (मेडिटेशन) और आध्यात्मिक अभ्यास के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहन…व्यक्तिगत अनुभव प्राप्त है.. वे इस विषय पर पहले से ही प्रतिष्ठित संस्थाओं के लिए नियमित रूप से ज्ञानवर्धक लेख लिखते रहे हैं।
- सिविल इंजीनियरिंग-: उनके पास सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में 15 वर्षों से अधिक का सक्रिय व्यावहारिक अनुभव है/ जो निर्माण… परियोजना प्रबंधन…. गुणवत्ता नियंत्रण और रखरखाव जैसे पहलुओं को कवर करता है….
प्रामाणिकता एवं विश्वसनीयता:
Trending Bharat टीम के सदस्य के रूप में/ अरविंद अपने लेखन में जटिल आध्यात्मिक अवधारणाओं को आधुनिक/ व्यस्त जीवनशैली के साथ सामंजस्य बिठाते हुए/ उन्हें व्यावहारिक एवं सुलभ बनाते हैं… उनकी सिविल इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि एक तार्किक, समाधान—-उन्मुख दृष्टिकोण प्रदान करती है… जिससे उनकी सामग्री विश्वसनीय और जमीन से जुड़ी रहती है.. उनका उद्देश्य पाठकों को ऐसा ज्ञान प्रदान करना है जो न केवल विचारोत्तेजक हो, बल्कि जीवन में उपयोगी भी हो..
यह लेख लेखक के व्यक्तिगत त्राटक अभ्यास और ध्यान के 10+ वर्षों के अनुभव पर आधारित है
डिस्क्लेमर: त्राटक अभ्यास
यह लेख सिर्फ जानकारी और आत्म-खोज के लिए है…. अगर आपकी सेहत,,, मानसिक स्थिति या नजर से जुड़ी कोई समस्या है… तो पहले डॉक्टर या योग गुरु से सलाह लें… त्राटक को एक आध्यात्मिक साधना मानें…. इलाज या विकल्प नहीं….
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