Last Updated on 2 weeks ago by Team Trending Bharat
चलिए, आज हम आपको किताबों, भारी-भरकम शब्दों और फार्मूलों से निकालकर एक बहुत पुरानी और दिलचस्प दुनिया में ले चलते हैं। एक ऐसी दुनिया जहाँ के वैज्ञानिक आज की तरह सफ़ेद कोट नहीं पहनते थे , वह उस समय आश्रमों और जंगलों में बैठकर ब्रह्मांड के ऐसे गहरे राज खोल रहे थे जिनपर आज की भौतिक प्रगति अपने द्वारा खोजी गयी विरासत मानती है
अगर कंटेंट पसंद आये तो पेज को मार्क जरुर कर लेना क्यूंकि कहानियां यहाँ ख़तम नहीं होती और ना ही उनके असली रचयिता.. यह पेज ऐसे ही रहस्यों को साइंटिफिक analogy में आपके सामने पेश करता है जिन्हें आप शायद आजतक अंधविश्वास समझाते आये हों
यह कहानी है हमारे प्राचीन ऋषियों की, जो आँखें बंद करके तपस्या तो करते थे, लेकिन उससे प्राप्त आंतरिक और वाहरिक ज्ञान जैसे तारों, गणित और प्रकृति के नियम को भी encode करते थे..इसी के सम्बन्ध में आज हम with साइंटिफिक temperament तीन कहानिया डिकोड करेंगे तो बनें रहें अंत तक
Table of Contents
पहली कहानी: एक ऋषि की कविता और जादुई नंबरों का खेल
बात आज से लगभग 300 ईसा पूर्व की है। पेशावर के पास शालातुर नाम का एक गाँव हुआ करता था। वहां पिंगलाचार्य नाम के एक महान ऋषि रहते थे। उन्हें श्लोक और कविताएं रचने के विज्ञान जिसे छन्द शास्त्र कहा जाता है का बहुत शौक था।
एक दिन पिंगलाचार्य बैठकर हिसाब लगा रहे थे कि किसी श्लोक में छोटे स्वर जिसे लघु कहते हैं और बड़े स्वर जिसे गुरु कहते हैं को कितनी तरह से पिरोया जा सकता है। उन्होंने एक बहुत ही मज़ेदार पैटर्न देखा। उन्होंने पाया कि: अगर 1 मात्रा है, तो उसे 1 तरीके से लिख सकते हैं। 2 मात्राएं हैं, तो 2 तरीके से । 3 मात्राएं हैं, तो 3 तरीके से । 4 मात्राएं हैं, तो 5 तरीके से । 5 मात्राएं हैं, तो 8 तरीके से लिखा जा सकता है
उन्होंने जब इसे एक लाइन में लिखा तो एक श्रृंखला बनी जिसे हम अगर सिंपल भाषा में लिखें तो ये नंबर्स बनेंगे: 1, 2, 3, 5, 8, 13, 21, 34, 55…
क्या आपने इसमें कोई जादू देखा? हर अगला नंबर, अपने से पिछले दो नंबरों का जोड़ था (जैसे 2+3=5, 3+5=8)। आज की दुनिया इसे Fibonacci Sequence कहती है और इसका पूरा श्रेय इटली के एक गणितज्ञ को देती है जो 13वीं सदी में हुए थे। लेकिन सच तो यह है कि यह जादुई गणित हमारे श्लोकों की ताल और संगीत से निकला था, वो भी दुनिया के इस गणित को जानने से हज़ारों साल पहले!
हैरान तो हुए होंगे आप अगर नहीं तो दूसरी कहानी पर चलते हैं
दूसरी कहानी: महर्षि कणाद और दुनिया का सबसे छोटा टुकड़ा
अब एक और कहानी सुनिए। दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व के आसपास, भारत में महर्षि कणाद नाम के एक ऋषि हुए थे। वो अक्सर सोचते थे कि यह पूरी दुनिया आखिर किस चीज़ से बनी है?
उन्होंने एक कमाल का विचार दिया था । उन्होंने कहा कि अगर हम किसी भी चीज़ को छोटे और छोटे टुकड़ों में तोड़ते जाएँ, तो अंत में एक ऐसा कण बचेगा जिसे और नहीं तोड़ा जा सकेगा । उन्होंने इस अविभाज्य और कभी न खत्म होने वाले कण को ‘परमाणु’ यानी की आज के समय का Atom कहा था ।
कहानी यहीं खत्म नहीं होती। उन्होंने यह भी बताया कि ये परमाणु आपस में ‘अदृश्य शक्तियों’ के कारण जुड़ते हैं और नई चीज़ें बनाते हैं। आज का विज्ञान जिसे ‘केमिकल बॉन्डिंग’ या ‘क्वांटम इंटरेक्शन’ कहता है, महर्षि कणाद ने उसे अपनी गहरी सोच और दूरदृष्टि से हज़ारों साल पहले ही समझ लिया था।
अब ये मत बोलना की मज़ाक कर रहा हूँ google कर के डिटेल में देख लो, और जल्दी से चलो तीसरी कहानी पर
तीसरी कहानी: उल्टा पेड़ और कभी न मरने वाली ऊर्जा
अब चलते हैं उपनिषदों की एक बहुत ही रहस्यमयी कहानी की तरफ जहाँ एक ऐसे विशाल ब्रह्मांडीय पेड़ जिसे अश्वत्थ कहते हैं का ज़िक्र आता है, जिसकी जड़ें आसमान में ऊपर की ओर हैं और शाखाएं नीचे ज़मीन की तरफ
इसमें एक बहुत बड़ा वैज्ञानिक राज छिपा था। ऋषियों ने बताया कि इस पूरी सृष्टि में एक भी ‘कण’ यानी atomic particle ऐसा नहीं है जो पूरी तरह से मिट या नष्ट हो सके। जिसे हम जन्म और मृत्यु कहते हैं, वह सिर्फ ‘ऊर्जा’ यानी living energies का अपना रूप बदलना है।
आज हमारे स्कूल की किताबों में इसे “Law of Conservation of Energy” यानी ऊर्जा संरक्षण का नियम कहा जाता है—कि ऊर्जा को न तो पैदा किया जा सकता है, न ही मिटाया जा सकता है। यह कमाल का Physics हमारे ऋषि-मुनियों ने सदियों पहले ही बता दी थी
तो देखा आपने! प्राचीन भारत के लोग सिर्फ दार्शनिक या साधु नहीं थे। वे असल में बहुत बड़े वैज्ञानिक थे। विज्ञान और आध्यात्मिकता उनके लिए अलग-अलग नहीं थे; दोनों मिलकर ब्रह्मांड के अनसुलझे रहस्यों को समझने का एक ही सुंदर रास्ता थे।
अब तो आपको लगा ना कि हमारा इतिहास किसी साइंस-फिक्शन कहानी से कम रोमांचक नहीं है!
ऐसे ही निरंतर “myth breaking facts “ जानने के लिये और हमारी मोटिवेशन के लिये पेज को सेव एंड मार्क जरुर करें
ॐ नमः शिवाये

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